Sunday, 11 June 2017

मुझे बहुत बुरा लगा मेरे बेबी ,एबी

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल का​ टिकट कटा लिया है। मुझे अफ्रीका से भारत के जीतने की जितनी खुशी है उतनी ही एबी डीविलियर्स के हारने का गम है। एबी डीविलियर्स उन फेवरेट क्रिकेटर्स में से हैं जिनकी वजह से वर्तमान क्रिकेट में आज भी मेरी दिलचस्पी बरकरार है।   दरअसल, जब से सौरव गांगुली ने क्रिकेट से संन्यास लिया है तब से मेरी इस खेल में दिलचस्पी कम होनी शुरू हो गई है। वर्ना एक दौर ऐसा भी था जब गांगुली की अगुवाई में 2003 विश्वकप के फाइनल में भारतीय टीम पहुंची तो हर मैच के हर शॉट तक दिमाग में फेवीकॉल की तरह चिपक गया था। सहवाग का वो पाकिस्तान दौरे पर मुल्तान का सुल्तान बन जाना या बालाजी का बैट टूट जाना या फिर इंग्लैंड में गांगुली का टी शर्ट उतारना, न जाने ऐसे कई पल हैं जिसको रेडियो पर सुन कर ही मैं एक रेखाचित्र तैयार कर लेता था।

दौर बदला, हर टीम के कप्तान बदल गए, आॅस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को भी हराना आसान हो गया। भारतीय टीम में अनुभवी प्लेयर बाहर होने लगे, नए चेहरे आने लगे। लेकिन कुछ नहीं बदला तो वो दक्षिण अफ्रीका का टैग। वो टैग, जिसे 'चोकर' कहते हैं। हर बड़े टूर्नामेंट से पहले अफ्रीका के हथियार डाल देने की आदत ने लोगों के दिमाग में 'चोकर' छवि को और गाढी ही की है। लेकिन हां, उसके बावजूद न जाने क्यों दक्षिण अफ्रीका के एक प्लेयर के लिए मेरी हमदर्दी हमेशा बरकरार ही रही। वो प्लेयर कोई और नहीं एबी डीविलियर्स हैं। तूफानी शुरुआत से लेकर शानदार विकेटकीपिंग तक न जाने कितने टैलेंट छुपे हैं इस शख्स में। अब्राहम बेंजामिन डीविलियर्स उर्फ अब्बास को अगर क्रिकेट की दुनिया का सुपरमैन भी कहा जाए तो कम ही होगा।
       अच्छा एक सवाल पूछता हूं, आपके दिमाग में अभी कितने खेल के नाम चल रहे हैं? हॉकी, फुटबॉल, रग्बी, स्विमिंग, गोल्फ, बैडमिंटन, एथलेटिक्स... अगर मैं कहूं कि सुपरमैन डीविलियर्स हर खेल के चैंपियन रह चुके हैं तो यकीन करेंगे। अगर यकीन नहीं तो गूगल कर लीजिए ये कोई फर्जी बात नहीं बल्कि सच्चाई है।   यह शख्स हर खेल में चैंपियन की तरह खेला और जब क्रिकेट की बात आई तो यहां भी दुनिया के कई रिकॉर्ड बनाए। डीविलियर्स मैदान में अनुशानसन से लेकर टीम भावना तक की सीख देते रहे हैं।  लेकिन वो बतौर कप्तान सफल नहीं हो सके। उनकी अगुवाई में भी अफ्रीका चोकर ही बनी रही। कई बार अकेले उन्होंने टीम को जीत दिलाई लेकिन हर टूर्नामेंट में फेल हो जाने की टीम की फितरत हमेशा बरकरार ही रही। उन हार के गम को डीविलियर्स अकसर आंसू के जरिए बाहर निकालते रहे हैं। हर बार मुझे उस मासूम चेहरे को देखकर दर्द होता है। विश्वकप 2015 से जब अफ्रीका की टीम बाहर हो रही थी तब भी मुझे दर्द हुआ था। वो दर्द डीविलियर्स के आंसू देखकर और गहरा हो गया था। कमोबेश यही स्थिति आज एक बार फिर चैंपियंस ट्रॉफी में बन गई।  बहरहाल, मेरे एबी डीविलियर्स की महानता इन हारों से कम नहीं होने वाली है।

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