Wednesday, 8 November 2017

बिग बॉस या बंदिश!



अगर आपसे कोई सवाल पूछे कि कौन सा ऐसा शो है जो परिवार संग देखना पसंद नहीं करेंगे? तो इस बात की अधिक संभावना है कि आपका जवाब कलर्स का चर्चित शो ‘बिग बॉस’हो। दरअसल, बिग बॉस एक ऐसा शो है जिसके जरिए चैनल द्वारा दर्शकों के बीच फूहड़ता और विवाद को बेहद ही चटपटे अंदाज में परोसा जाता है। शो के मेकर्स भी इस सच को मान चुके हैं कि जितने विवाद जुड़ेंगे, टीआरपी उतनी ज्यादा मिलेगी। यही वजह है कि हर सीजन में कंटेस्टेंट को सेलेक्ट करने से पहले बेहद रिसर्च किया जाता है। इस रिसर्च के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कंटेस्टेंट कितना विवादित है।

इसके अलावा इस बात पर भी गौर किया जाता है कि कौन सा कन्टेस्टेंट सबसे ज्यादा फुटेज ले सकता है। यह भी सच है कि बिग बॉस के अब तक के सफर में चैनल ने शो के साथ हर तरह के प्रयोग किए। शो के होस्ट में बदलाव से लेकर कॉमनर्स की घर में एंट्री तक इन्हीं प्रयोगों की एक बानगी है।

स्वामी ओम और बिग बॉस

मसलन, पिछले सीजन में स्वामी ओम जैसे विवादित कॉमनर्स को ‘बिग बॉस’ के घर में एंट्री दी गई। जब स्वामी ओम घर में पहुंचे तब उनकी हरकतों को देखकर देशभर के लोग हैरान थे। खुद को संत बताने वाले स्वामी ओम को लोगों ने घर के अंदर अश्लीलता के अलावा लड़ाई करते हुए भी देखा।
इससे स्वामी ओम को पॉपुलैरिटी तो मिली ही उसके साथ ही शो की टीआरपी भी अच्छी रही। शो से बाहर किए जाने के बाद स्वामी ओम ने बिग बॉस और होस्ट सलमान खान की जमकर आलोचना की।

ठीक उसी तरह इस सीजन में भी कई दिलचस्प किरदार घर में रहने के लिए चुने गए। उन्हीं में से एक ​दाउद इब्राहिम के कथित रिश्तेदार जुबैर खान भी थे। जुबैर को सीजन के पहले वीकेंड पर ही घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस दौरान शो के होस्ट सलमान खान ने उन्हें लताड़ भी लगाई। शो से बाहर होने के बाद जुबैर ने भी स्वामी ओम की तरह मीडिया में जमकर बयानबाजी की। जुबैर ने एक कदम आगे बढ़कर सलमान खान के खिलाफ केस भी कर दिया।
इस साल शो में एक और दिलचस्प किरदार की एंट्री हुई । इस किरदार का नाम ढिंचैक पूजा है। बदनाम होकर भी नाम कमाने वाली पूजा को इंटरनेट की दुनिया की नई सनसनी कहना गलत नहीं होगा।
कुछ ऐसी ही कहानी अर्शी खान की भी है। खुद को पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी के बच्चे की मां बताने वाली अर्शी भी इस सीजन की सबसे बड़ी ड्रामेबाज किरदारों में से है। ऐसे किरदारों के जरिए दर्शकों को मनोरंजन तो मिलता है लेकिन वो बातें पीछे छूट जाती हैं जिसके लिए लोग शो देखते हैं।

शो का मकसद

किसी शो का मकसद हर उम्र के लोगों को एंटरटेन करना होना चाहिए ताकि परिवार संग भी उस शो का हिस्सा बना जा सके। यह अहम नहीं ​है कि शो का प्रसारण समय क्या है, यह देखना जरूरी है कि क्या इस शो के जरिए हर उम्र और हर वर्ग के लोग एंटरटेन हो पा रहे हैं या फिर एंटरटेनमेंट की भी एक लकीर खींच गई है, इस लकीर के उस पार परिवार है तो इस पार आप। अगर ऐसा है तो समझ लीजिए कि वो एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि बंदिश है। बिग बॉस की इस बंदिश में रहकर एंटरटेनमेंट की तलाश कर रहे हैं तो वो मिलना मुश्किल है। एंटरटेनमेंट तो वो होता है जिससे कोई हिचक न हो। अगर हिचक हो रही है तो वो एंटरटेनमेंट नहीं, अश्लीलता है। ऐसे में यह जरूरी है कि बिग बॉस को उस लायक बनाया जाए जिसे परिवार संग देखा जा सके।     

Saturday, 23 September 2017

ताकि 'भरोसे' में न पड़े दरार..

यह महज संयोग ही है कि जब देश के पीएम नरेंद्र मोदी काशी के दौरे पर हैं उसी वक्‍त में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में बेटियां अपने वजूद की लड़ाई  लड़ रही हैं। ऐसे में सवाल है कि पीएम और यहां के सांसद मोदी का रिएक्‍शन क्‍या होना चाहिए? क्‍या उन्‍हें अपने रुट में बदलाव कर लेना चाहिए या फिर वहां जाकर बेटियों के इस मुहिम को बल देना चाहिए। BHU की लड़कियों का दर्द साधारण नहीं है। एक बार के लिए मान लेते हैं कि उनकी पीड़ा सुनने की पीएम मोदी को फुर्सत नहीं है लेकिन राज्‍य के सीएम योगी आदित्‍यनाथ भी क्‍यों खामोश हैं। पिछले दिनों मोदी जी ने जिस तरह ट्रिपल तलाक पर सक्रियता दिखाकर महिलाओं को न्‍याय दिलाया वो बेहद सराहनीय था। लेकिन इस मोर्चे पर इतना कमजोर होने की क्‍या जरूरत थी, ये समझ से परे है।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी किसी मोर्चे पर अबूझ पहेली बने हैं। इससे पहले भी तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिसपर उनका रिएक्‍शन थोड़ी देर या फिर नहीं भी आया है। मीडिया की नजर में शायद खामोशी या फिर रुट बदलना उनका 'मास्‍टर स्‍ट्रोक'हो लेकिन उनके इस रंग से लोगों के भरोसे को सेंध जरूर लग रहा है। मैंने पिछले 3 सालों में तमाम ऐसे लोगों के भरोसे में सेंध लगते देखा है जिन्‍हें कभी यकीं था। कुछ लोगों की नजर में आम जनता का यही भरोसा 'भक्‍त' की संज्ञा दे चुका है। मैं भी उन लोगों की नजर में भक्‍तों में से ही हूं। लेकिन सच भी यह है कि उन भक्‍तों के भरोसे में दरार पड़ रही है। अधिकतर विरोधियों के लिए मोदी सरकार की ज्‍यादा से ज्‍यादा नाकामी ही सुकून देती है, लेकिन जो लोग भरोसा करते हैं उनकी नजर में यह नाकामी सिर्फ एक सवाल है। ये भी जान लीजिए कि उनके लिए यह तब तक सवाल है जब तक कि इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिल जाता है। वर्ना वो दिन भी आ जाएंगे जब मोदी सरकार की तुलना भी कांग्रेस के 'काल' से की जाने लगेगी।

आर्थिक मोर्चे पर नाकामी, महंगाई, रोजगार के अवसर की कमी, अपने कठोर फैसलों को जस्टिफाई न कर पाना, बेवजह इवेंटबाजी या बयानबाजी और न जाने क्‍या - क्‍या। ऐसे तमाम मौके आए हैं जब मोदी सरकार ने इसके परिणाम की चिंता नहीं की है। यह ठीक वैसे ही है जैसे कांग्रेस ने 2010 के बाद किया था। कम से कम भाजपा सरकार को कांग्रेस के इस रवैये का परिणाम तो याद ही होगा । 

Monday, 4 September 2017

कंगना से क्रश की वजह..

वैसे तो मेरी बॉलीवुड एक्‍ट्रेसेस से कभी भी, किसी भी तरह की एकतरफा इश्‍कबाजी नहीं रही और न ही मैंने कभी किसी एक्‍ट्रेसेस की कल्‍पना कर अपनी दुनिया को आभासी बनाने की कोशिश की। लेकिन कंगना रनौट के प्रति मेरा ये ज्ञान फेल होता नजर आ रहा है। कंगना रनोत मतलब बेबाक, बेपरवाह, बिंदास और विवादित। फिल्म जगत का ऐसा नाम, जिसे आप पसंद करें या नापसंद, लेकिन नजरअंदाज नहीं कर सकते। मात्र 10 साल में कंगना ने फिल्मों के ग्रंथ पर कभी न मिटने वाली स्याही से छाप छोड़ी है।


मेरी कंगना से क्रश की वजह उनकी हिम्‍मत है। पिछले दिनों कंगना रनौट ने जब इंडिया टीवी के प्रोग्राम आप की अदालत में बोलना शुरू किया तो अच्‍छे – अच्‍छों की बोलती बंद कर दी। हिमाचल के छोटे से शहर की इस बोल्‍ड और बिंदास लड़की की बेबाकी ने मुझे दीवाना बना दिया है। परिवार के खिलाफ कौन सी लड़की बोल पाती है, वो भी दुनिया के सामने..लेकिन कंगना ने बोला भी और परिवारों में भाई-बहन के अंतर को भी परत दर परत खोल दिया. ..दरअसल, 
कंगना बॉलीवुड की उस भीड़ से बिल्‍कुल अलग हैं, जो दोगली जिंदगी जीने में यकीं करती है। वह उन लोगों में से नहीं हैं जो बॉलीवुड के चाटूकारों की श्रेणी में आता है। वह उनमें से हैं जो हर कदम पर बॉलीवुड के उस पिंजरे को चोट पहुंचाती आ रही हैं जिन्‍हें हेमामालिनी, वैजयंतीमाला, माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी, काजोल और करीना सरीखी अभिनेत्रियों ने भी तोड़ने की कोशिश नहीं की। कंगना के बिंदास अंदाज को देखकर मुझे बॉलीवुड की जमात बेहद स्‍वार्थी नजर आती है।



करन जौहर से लेकर जावेद अख्‍तर तक   


कंगना ने बॉलीवुड के लगभग हर ताकतवर लॉबी को चुनौती दी है। वर्ना रितिक रोशन जैसे एक्‍टर से टक्‍कर कौन ले सकता है। आदित्‍य पंचोली फिर शेखर सुमन के बेटे अध्‍ध्‍यन और फिर कंगना ने जिस तरीके से बॉलीवुड के बच्‍चा पार्टी को लॉन्‍च करने का ठेका उठाने वाले करण जौहर को ललकारा उसने तो मेरे दिल के तार छेड़ दिए। खासतौर पर करण जौहर वो शख्‍स है जिसको, प्रेस कॉन्‍फ्रेंस से लेकर फिल्‍म प्रमोशन तक बड़ी – बड़ी एक्‍ट्रेसेस खुशामद करती नजर आती हैं। वह यहीं नहीं रुकीं, उन्‍होंने इशारों में बॉलीवुड के टॉप राइटर जावेद अख्तर को भी लपेटे में ले लिया। यह वही वक्‍त था जब कंगना मेरे दिलों दिमाग में घर कर रही थीं।  

हो सकता है आप इसे उनकी आने वाली फिल्‍म सिमरन का प्रमोशन कहें। हो सकता है कंगना कल को बॉलीवुड लॉबी की शिकार हो जाएं। हो सकता है उनको फिल्‍में न मिले। हो सकता है वह बॉलीवुड से बॉयकॉट हो जाएं। हो सकता है, जो हमारी सोच में न हो कुछ ऐसा बुरा हो जाए। लेकिन यह तो तय है कि कंगना की ठसक कभी कम नहीं होने वाली है।     





Wednesday, 30 August 2017

नोटबंदी का लेखा-जोखा : 5 फायदे और 5 नुकसान


नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने पहली बार व्‍यापक रूप में आंकड़े जारी किए हैं। आरबीआई ने बुधवार को अपनी एनुअल रिपोर्ट जारी कीजिसके बाद नोटबंदी को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। जहां सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर अपनी सफलता गिना रही हैवहीं विपक्ष ने नोटबंदी पर फिर से सवाल खड़े किए हैं। हालांकि एक बात तय है कि नोटबंदी से जहां देश को कई फायदे हुए हैं वहीं कुछ नुकसान भी उठाने पड़े हैं।

आखिर क्‍या था नोटबंदी का लक्ष्‍य

सरकार ने नोटबंदी के दौरान ब्‍लैक मनी पर रोक,आतंकी फंडिंग और नकली नोटों की समस्‍या खत्‍म होने का भरोसा दिलाया था। हालांकि इन मुद्दों पर कितनी सफलता मिली यह कुछ समय बीतने के बाद ही तय होगा।  

इकोनॉमिस्‍ट की नजर में फायदे

ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट का मानना है कि इससे पहला फायदा टैक्‍सपेयर्स का दायरा बढ़ने के रूप में सामने आया है। सरकार का इरादा ब्‍लैकमनी को सामने लाना था। जब सारा पैसा सिस्‍टम में आ गया हैतो इसे ब्‍लैकमनी को एक तरह से खत्‍म ही माना जा सकता है। लोगों ने अपना पैसा बैंकों में जमा किया है और बाद में टैक्‍स देना शुरू किया है। सरकार को यह टैक्‍स अब हरदम मिलेगायानी फायदा मिलता ही रहेगा। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 91 लाख नए टैक्‍सपेयर्स बढ़े हैं। इसके पिछले साल की अपेक्षा इनमें 80 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।

कर्ज सस्‍ता मिलने का रास्‍ता खुला

दूसरा फायदा बैंकों में अचानक जमा राशि बढ़ने के रूप में सामने आया है। इसके चलते लोगों को कर्ज सस्‍ता मिलने का रास्‍ता खुला है। हाउसिंग लोन पर सभी बैंकों ने अपनी कर्ज की दर को घटा दिया है। पिछले साल हाउसिंग लोन की दरें जहां 10.5 से लेकर 12 फीसदी के बीच थीं वहीं यह अब 8 से 9 फीसदी के बीच आ चुकी हैं।

महंगाई पर लगाम लगी

तीसरा फायदा महंगाई घटने के रूप में सामने आया है। इकोनॉमिस्‍टों के अनुसार ब्‍लैकमनी से लोग अनापशनाप खरीदारी करते हैंजिससे चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। लेकिन पूरा पैसा सिस्‍टम में आने से ऐसी चीजें रुकी हैं,जिससे महंगाई पर लगाम लगी है। जहां नवंबर 2016 में यह दर 3.63 फीसदी थीजो जुलाई 2017 में घट कर 2.36 फीसदी पर आ गई।

कैशलैस ट्रांजेक्‍शन में इजाफा

इसके अलावा चौथा फायदा सोसाइटी में कैशलैस ट्रांजेक्‍शन बढ़ने के रूप में सामने आया है। नोटबंदी से सरकार लगातार कैशलैस ट्रांजेक्‍शन बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इससे जहां पूरा कारोबार ऑन पेपर हो रहा हैवहीं बाजार में नोटों की जरूरत कम हो रही है। इससे टैक्‍स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक के डाटा के अुनसार नवंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच 33 फीसदी ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन बढ़ा है।

नकली नोट छापना मुश्किल

जानकारों की राय में नोटबंदी से पांचवां बड़ा फायदा नकली नोटों को रोकने में मिला है। आतंकी फंडिंग में इन नोटों का बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल होने का आरोप था। सरकार का दावा है कि नोटबंदी के बाद से आंतकी फंडिंग पर ब्रेक लग गया है। 500 और 2000 के नए नोट में सिक्‍युरिटी फीचर बढ़ाए गए हैं। इसके चलते नए नोट नकली छापना कठिन हो रहा है वहीं पुराने नोट बंद होने से यह समस्‍या फिलहाल पूरी तरह से रुक गई है।


नोटबंदी के ये हुए नुकसान


जहां कुछ इकोनॉमिस्‍ट फायदे गिना रहे हैंवहीं इसके नुकसान भी गिनाए जा रहे हैं। जानकारों की राय में पहला नुकसान कंपनियों के कारोबार पर पड़ा। इससे कंपनियों का प्रॉफिट घटा। रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के अुनसार वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में 448 कंपनियों की ग्रोथ में गिरावट दर्ज की गई है। यह इसके एक साल पहले इसी तिमाही में 8.3 फीसदी से घटकर 5.3 फीसदी पर आ गई है। यही नहीं कंपनियों का शुद्द लाभ भी 1.80 फीसदी से घटकर 15.7 फीसदी पर आ गया।

लाखों लोगों की गई नौकरी

वहीं इससे जुड़ा दूसरा नुकसान नौकरियों में कमी के रूप में आया। कंपनियों का जब कारोबार प्रॉफिट घटा तो उन्‍होंने लोगों की छंटनी की। जिससे लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। CMIE के अनुसार नोटबंदी के बाद से करीब 15 लाख नौ‍करियां गई हैं।

जीडीपी में गिरावट

इसका तीसरा असर देश की जीडीपी में गिरावट के रूप में सामने आया। पिछले साल देश की जीडीपी में गिरावट दर्ज की गई। CSO के डाटा के अनुसार 2016-17 में जीडीपी गिरकर 6.6 फीसदी पर आ गई। यह दर 2015-16 के दौरान 7 फीसदी के ऊपर थी।

ब्‍याज दरों में कमी

चौथा नुकसान लोगों को बैंकों में सेविंग अकाउंट में ब्‍याज दरों में कमी के रूप में सामने आया है। देश में अभी तक कभी भी सेविंग अकाउंट में ब्‍याज दरें नहीं घटीं थींलेकिन अब ज्‍यादातर बड़े बैंक अपने सेविंग में ब्‍याज दरों को आधा फीसदी घटा कर 3.5 फीसदी कर चुके हैं।

गंवानी पड़ी जान

वहीं पांचवां नुकसान ऐसा रहा है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। देश में नोटबंदी के दौरान कुछ लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी। यह लोग बैंकों से नई करेंसी लेने के लिए लाइनों में लगे थेजिस दौरान यह हादसे सामने आए। मीडिया रिपोर्ट के अुनसार करीब 90 से ज्‍यादा जानें इस दौरान गईं। 

Thursday, 10 August 2017

गाली देने के लिए ‘सराहा’ सबसे शानदार

आज लगभग हर ऑफ़िस जाने वाला इंसान अपने बॉस की डांट से परेशान रहता है। यही वजह है कि दोनों के बीच रिश्‍तों में कड़वाहट बनी रहती है। कई कर्मचारी तो ऐसे भी होते हैं जिन्‍हें अपने बॉस पर बरसने की इच्‍छा होती है लेकिन जॉब की मजबूरी की वजह से बर्दाश्‍त कर जाते हैं। इसी से परेशान होकर सउदी अरब के सॉफ्टवेयर डेवलेपर जैनुल अलेबदीन तौफिक ने एक ऐप को लॉन्‍च किया।


30 करोड़ बार डाउनलोड
28 साल के तौफिक को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका ऐप दुनियाभर में फेमस हो जाएगा। करीब एक महीने पहले लॉन्च हुए इस ऐप को दुनियाभर में करीब 30 करोड़ से ज्‍यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। वहीं भारत में यह ऐप स्टोर पर टॉप ट्रेंड कर रहा है।

बॉस पर भड़ास निकालना मकसद
इस ऐप का नाम ‘सराहा’ है। यह अरबी का शब्‍द है जिसका हिंदी अर्थ ईमानदारी या स्‍पष्‍टता होता है। फाउंडर जैनुल अलेबदीन तौफिक ने फरवरी 2017 में इसका वेबसाइट लॉन्च किया लेकिन जुलाई में इसका ऐप भी बनाया गया। तौफिक ने एक इंटरव्‍यू में बताया कि इस ऐप को बनाने का मकसद उसे अपने बॉस पर अपनी भड़ास निकालना था।

भारत से खास कनेक्‍शन
वेस्‍टर्न सउदी अरब के मेडिना शहर के रहने वाले ऐप के फाउंडर तौफिक ने किंग फाहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम से कंम्‍प्‍यूटर साइंस में बैचलर डिग्री की पढ़ाई की है। तौफिक ने भारत की आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड में बतौर जूनियर कंसल्‍टेंट की नौकरी भी की है। इसके अलावा उन्‍होंने सउदी की एक प्राइवेट कंपनी में बिजनेस सिस्‍टम एनालिसिस का जॉब किया।      

इस ऐप की खासियत
इस ऐप के जरिए आप अपने प्रोफाइल से लिंक किसी भी व्यक्ति को मैसेज भेज सकते हैं। लेकिन सबसे दिलचस्‍प पहलू यह है कि मैसेज पाने वाले को यह पता नहीं चलेगा कि ये मैसेज किसने भेजी है। जाहिर है, इसका जवाब भी नहीं दिया जा सकता और यही कारण है कि ये ऐप लोगों के बीच बहुत तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है।

कैसे काम करता है ऐप
सबसे पहले अपने स्‍मार्टफोन में प्ले स्टोर से ऐप को डाउनलोड करना होगा। इसके बाद यूजर को रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके लिए ईमेल आईडी देनी होगी। रजिस्टर्ड होने के बाद इसका लिंक फेसबुक समेत दूसरे सोशल नेटवर्क पर पोस्ट करने का ऑप्शन मिलता है। इस लिंक को पब्लिक कर सकते हैं या प्राइवेट मैसेज के जरिए किसी को भेज सकते हैं। जैसे ही लिंक के जरिए कोई आपको मैसेज भेजता है ऐप में नोटिफिकेशन मिलेगा। हालांकि मैसेज भेजने वाले शख्‍स के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाएगी।  

Monday, 7 August 2017

चोटी नहीं, पंख बचाइए...

पिछले कुछ दिनों से दो खबरों ने लोगों के जेहन में आतंक फैला रखा है। पहली खबर मॉर्डन दौर के इंटरनेट गेम ब्‍लू व्‍हेल की वजह से मौत की जद में जा रहे बच्‍चों से जुड़ी है तो दूसरी खबर महिलाओं की रहस्‍यमयी चोटी काटने की है। इन दोनों खबरों ने लोगों की सोच के डोर को दो छोर पर ला खड़ा किया है। इंटरनेट गेम के जरिए बच्‍चों की मौत ने जहां आधुनिकता को नई चुनौती दे दी है तो वहीं चोटी काटने की घटना ने मॉर्डन इंडिया के मुहिम को सदमा पहुंचा दिया है। इंटरनेट गेम के जरिए जान जाने की घटना किसी भी मायने में कम नहीं हो सकती लेकिन हां, उसे कंट्रोल करने के तमाम उपाय तलाशे जा सकते हैं। लेकिन क्‍या चोटी काटने की घटना को भी उसी की तरह है। मेरा मानना है शायद नहीं। ये सिर्फ चोटी काटने की घटना भर नहीं है, ये लड़कियों या महिलाओं के पर कतरने का जरिया भी बन निकला है। दरअसल, महिलाएं इस भोथरे समाज में लोथड़े से ज्‍यादा नहीं हैं। उनके हर कदम हमारी मर्दनागी को चुनौती देने का काम करती है। तभी तो हवस भरी निगाहों से ही रेप कर दिया जाता है और उससे भी जी न भरे तो जबरदस्‍ती भी कर लेते हैं। दरअसल, महिलाओं को घर से बाहर निकलने नहीं देना और चारदिवारी में समेट कर रखना ही हमारी जीत है। अगर निकले भी तो पूरी तरह से देहाती बनकर ही निकले तभी भला होगा क्‍योंकि मॉडर्न लुक पचाने की हमारे अंदर पाचन शक्ति नहीं है। ऐसे में क्‍यों न ऐसा स्‍वांग रचा जाए, जिसमें डर का माहौल बन जाए और फिर वह घर के अंदर दुबकी रहे। जरूरी नहीं कि चोटी काटने की हर घटना के पीछे का मकसद यही हो लेकिन अधिकतर में यही स्थिति है। 

  यह स्थिति किसी जानलेवा गेम से कहीं ज्‍यादा खतरनाक है। इस स्‍वांग के जरिए महिलाओं का दम घोटनें का काम किया जा रहा है। चोटी कौन काट रहा है, क्‍यों काट रहा है, इसको गंभीरता से लेने की बजाए मजाक का बिषय बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर फनी तस्‍वीरें शेयर की जा रही हैं। इस मजाक के जरिए मामले की गंभीरता को दबाया जा रहा है। गौर से समझिए,  इशारों में महिलाओं और लड़कियों को धमकाया जा रहा है। अगर इस बेहूदा मजाक का हिस्‍सा आप भी हैं तो निश्चित ही महिलाओं की आजादी को कैद करने का काम कर रहे हैं। सरकारें मौन देख रही हैं, मौन देखेंगी भी क्‍योंकि उन्‍हें भी आपके पंख काटने में ही शांति मिलती है। इस सोशल आबोहवा में गुमराह न होइए, इस साजिश को बेनकाब कीजिए और चोटी नहीं अपने पंख को बचाइए।
          

Friday, 28 July 2017

तो होगी शांता की सुनवाई !

अगर कोई सवाल पूछे कि तुम जहां रहते हो उसके पड़ोसी जिले में कितनी बार गए हो तो शायद 99 फीसदी लोगों का जवाब  बहुत बारहोगा। लेकिन मैं उन 1 फीसदी लोगों में से हूं जिनका जवाब 2 से 4 बार होगा। जी हां, मैं अपने जिला सीवान का होकर भी चंद किलोमीटर दूर गोपालगंज बेहद कम गया हूं। यहां मेरे इस कथित पराक्रम का मकसद गोपालगंज की स्थिति से रूबरू कराना है।
दरअसल, जिस दौर में सीवान के हिंदू शहाबुद्दीन के खौफ में जी रहे थे उसी दौर में गोपालगंज में सतीश पांडे ने हिंदुओं के लिए खड़े हुए और उन्‍होंने समय – समय पर शहाबुद्दीन को चुनौती भी दिया। संभवत: यही वजह है कि सतीश पांडे के बाहुबली पराक्रम में लोगों ने उसमें रॉबिन हुड देखा। लेकिन गोपालगंज में भाजपा के दिग्‍गज नेता कृष्‍णा शाही की हत्‍या के बाद से पहली बार सतीश पांडे सवालों के घेरे में हैं। दरअसल, कृष्‍णा शाही की पत्‍नी शांता ने इशारों में ही सतीश पांडे पर आरोप लगा दिया है। उनका कहना है कि परिवार को जदयू विधायक अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय उर्फ़ पप्पू पाण्डेय उनके भाई सतीश पांडे और भतीजा मुकेश पांडे से खतरा है। उन्‍होंने इस मामले की सीबीआई जांच कराने की भी मांग कर डाली है। वहीं पुलिस इस हत्‍या को रंजिश और अवैध संबंध से जोड़ कर देख रही है। अहम बात तो यह है कि जिस जेडीयू विधायक पर शांता शाही ने आरोप लगाया है उनकी पार्टी अब भाजपा के साथ सरकार चला रही है। तो ऐसे में यह देखना अहम है कि शांता शाही के मामले में कोई सुनवाई होगी।

Sunday, 9 July 2017

बिजनेस की पिच पर भी ‘मास्‍टर’ हैं गावस्‍कर

 क्रिकेट इतिहास में सुनील गावस्‍कर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। गावस्‍कर लगभग 45 सालों से भारतीय क्रिकेट से किसी न किसी तरह जुड़े हैं। उनके क्रिकेट रिकॉर्ड से लेकर शैली तक की चर्चा आज भी होती रहती है। बहुत कम ही लोग जानते हैं कि क्रिकेट दुनिया के लिटिल मास्‍टररहे गावस्‍कर ने बिजनेस की दुनिया में भी खूब नाम कमाया है। सुनील गावस्‍कर क्रिकेट कैरियर के समय में ही बिजनेस की दुनिया में कूद पड़े थे।
  
 उन्‍होंने एडवरटाइजिंग प्रोफेशनल सुमेध शाह के साथ मिलकर 1985 में प्रोफेशनल मैनेजमेंट ग्रुप (पीएमजी) नामक कंपनी बनाई थी। यह भारत की पहली स्‍पोर्ट्स मार्केटिंग कंपनी थी। पीएमजी भारत की एकमात्र ऐसी कंपनी है जो स्‍पोर्ट्स के क्षेत्र में अलग अलग तरह की सर्विस देती है। यह कंपनी हॉकी, बैडमिंटन, पोलो और फुटबॉल समेत अन्‍य गेम्‍स में एक्टिव है। यह कंपनी पिछले 30 सालों से ज्‍यादा समय से अलग अलग स्‍पोर्ट्स के लिए इवेंट और मीडिया मैनेजमेंट का काम करती आ रही है। इसमें क्रिकेट अवार्ड्स, स्‍पॉन्‍सरशिप और कंसल्‍टींग जैसा काम शामिल है। वर्तमान में यह कंपनी सैम बलसारा की एड एंड पीआर एजेंसी मैडिसन वर्ल्‍ड का हिस्‍सा बन गई है।
   गावस्‍कर की इस कंपनी से भारतीय टीम के ओपनर शिखर धवन, सरफराज अहमद और हॉकी कप्‍तान रहे सरदार सिंह जैसे बड़े नाम जुड़े हैं। ये कंपनी इन प्‍लेयर्स के कमर्शियल और मैनेज्‍मेंट का काम देखती है। 1987-88 में  'सुनील गावस्‍कर प्रेजेंटनाम से पहला स्‍पोर्ट्स प्रोग्राम दूरदर्शन पर दिखाया गया था।  इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवार्ड की भी शुरुआत इसी कंपनी ने की थी। इस कंपनी ने गोल्‍फ के लिए भी कई अहम इवेंट लॉन्‍च किए।




Thursday, 22 June 2017

टेलिकॉम कंपनियां दे रही हैं भारी डिस्‍काउंट, आप भी उठाएं फायदा


नई दिल्‍ली। वैसे तो टे‍लिकॉम इंडस्‍ट्री में रिलायंस जियो की एंट्री के बाद से ही फ्री सर्विसेज और डिस्‍काउंट का दौर चल निकला है। एयरटेल, वोडाफोन समेत लगभग सभी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों ने फ्री कॉलिंग, मैसेज और फ्री डाटा जैसे ऑफर दे रही हैं। यही नहीं, कंपनियां अगल – अलग तरीके से भी कस्‍टमर्स को ऑफर दे रही हैं। इन ऑफर्स को पोस्‍टपेड और प्रीपेड कस्‍टमर्स खूब एंज्‍वॉय कर रहे हैं। किसी भी टेलिकॉम कंपनी के प्रीपेड कस्‍टमर्स के लिए अच्‍छी बात होती है कि वह अपने सुविधा के अनुसार प्‍लान रिचार्ज करते हैं और फ्री सर्विसेज का फायदा उठाते हैं।


हालांकि पोस्‍टपेड कस्‍टमर्स के साथ ऐसा नहीं है। दरअसल, पोस्‍टपेड कस्‍टमर्स इस फ्री सर्विसेज को एंन्‍ज्‍वॉय तो करते हैं, उसके एवज में कस्‍टमर्स को एक्टिव कराए गए प्‍लान के महंगे मंथली चार्ज (रेंटल ) हर हाल में देने ही पड़ते हैं। लेकिन क्‍या आपको पता है, फ्री सर्विसेज जारी रखते हुए भी कंपनियां मंथली चार्ज में डिस्‍काउंट देती हैं। आज हम आपको उसी तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके जरिए रेंटल में  डिस्‍काउंट ले सकते हैं।   

कैसे ले सकते हैं डिस्‍काउंट
दरअसल, टेलिकॉम कंपनियां इन दिनों अपने कस्‍टमर्स को लुभाने और नेटवर्क के साथ बरकरार रखने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही हैं। कस्‍टमर्स को अलग – अलग तरह की बेनिफिट दी जा रही हैं। इसी के तहत कंपनियां पोस्‍टपेड कस्‍टमर्स को रेंटल तक में डिस्‍काउंट दे रही हैं।  

कॉल या मैसेज से उठाएं फायदा

हमें कई ऐसे कस्‍टमर्स मिले हैं जिन्‍हें कस्‍टमर केयर में कॉल करने या फिर पोर्ट का मैसेज डालने पर कंपनी की ओर से रेंटल में डिस्‍काउंट दे दिया गया है। हालांकि इस मामले में टेलिकॉम कंपनियां खुलकर कुछ बोलने से बच रही हैं। लेकिन वह इस बात से भी सहमत हैं कि अपने पुराने और ईमानदार कस्‍टमर्स को अपने नेटवर्क में बनाए रखने के लिए डिस्‍काउंट दिया जाता है।    

कैसे ले सकते हैं डिस्‍काउंट

कुछ कस्‍टमर्स का दावा है कि उन्‍होंने कस्‍टमर केयर में कॉल करने के बाद सीनियर अधिकारियों से नेटवर्क छोड़ने की बात कही तो उन्‍हें तमाम फ्री सर्विसेज को बरकरार रखते हुए किफायती ऑफर दिया गया। वहीं कुछ कस्‍टमर्स ने बताया कि जब उन्‍होंने PORT का मैसेज 1900 पर भेजा उसके बाद कंपनी की ओर से कॉल आया और उन्‍हें डिस्‍काउंट रेंटल के साथ कई आकर्षक ऑफर दिए गए।  




Tuesday, 20 June 2017

एक लीजेंड का यूं जाना..

करीब एक साल पहले की बात है , अनिल कुंबले टीम इंडिया के कोच बने थे। दिल से मुझे खुशी हुई लेकिन आज जब उन्‍होंने टीम के कोच पद छोड़ा है तो बेहद आहत हूं। दरअसल, अनिल कुंबले ने बतौर खिलाड़ी , बतौर कोच एक लड़ाके की भूमिका निभाई। कुंबले की छवि फिरोजशाह कोटला में 74 रन देकर दस विकेट लेने वाले लेग स्पिनर या विवादास्‍पद 'मंकीगेट' सीरीज के दौरान ऑस्‍ट्रेलिया में आगे बढ़कर लीडरशिप करने से ज्‍यादा है। अगर कुंबले के कोच पद से इस्तीफा देने की वजह कुंबले से विवाद है या फिर पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में मिली हार की वजह से उन्हें यह पद गंवाना पड़ा है तो दोनों ही स्थितियों में उनके साथ अन्यया हुआ है।
लंबे समय तक मूंछे रखने और सज्जन से दिखने वाले कुंबले ने इंजीनियरिग की पढ़ाई की है। वह मैदान के बाहर भी और अंदर भी किसी इंजीनियर सरीखे ही दिखते हैं, सीधे और भोले से। चेहरे से भोले दिखने वाले अनिल कुंबले बतौर गेंदबाज कितने 'दबंग' रहे हैं?, जिन्होंने उनके सामने बल्लेबाजी की है, वो सब समय - समय पर बताते रहे हैं। कुंबले के रिकॉर्ड और उनकी शख्सियत के बारे में क्रिकेट की समझ रखने वाला हर इंसान जानता है लेकिन बहुत कम लोग इस रोचक तथ्य को जानते होंगे कि 6.2 इंच के अनिल के नाम के साथ लगा 'कुंबले' उनकी जाति नहीं बल्कि गांव का नाम है। बंगलोर में जन्में, कुंबले को कम उम्र से ही क्रिकेट में रूचि पैदा हो गई थी। वह बी एस चंद्रशेखर जैसे क्रिकेटरों का खेल देखते हुए बडे हुए। कुंबले का वैवाहिक जीवन भी बेहद ही दिलचस्प रहा है। उनका दिल तलाकशुदा चेतना पर आया। चेतना की पहले पति से एक बेटी आरुनी  भी थी लेकिन कुंबले ने उसे हाथों हाथ लिया और 1999 में शादी कर ली। शादी के बाद उनके दो बच्चे, बेटा मायस कुंबले और बेटी स्वास्ती हुए।  कुंबले ने अपने सम्मान और त्याग को टीम और परिवार के हित से ऊपर कभी नहीं रखा। जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने पत्नी चेतना के लिए उनके पहले पति से कानूनी लड़ाई भी लड़ी । यह लड़ाई बेटी को हासिल करने की थी। कुंबले ने इस लड़ाई में चेतना का हर कदम पर साथ दिया और उनकी शख्सियत के मुताबिक उन्हें जीत भी मिली। कोई यह कैसे भूल सकता है जब वेस्टइंडीज में भारत का मैच हो रहा था। उस वक्त कुंबले को पहले कहा गया कि वो मैच में खेल रहे हैं, फिर कहा गया कि नहीं खेल रहे हैं, फिर दोबारा से कहा गया कि खेल रहे हैं।  कुंबले जिंक का पेंट लगाकर मैदान का चक्कर काट रहे थे। आख़िरकार जब टीम की घोषणा हुई तो उसमें कुंबले का नाम नहीं था। एक सीनियर खिलाड़ी के साथ इस तरह का बर्ताव हुआ, लेकिन जब भारत टेस्ट मैच जीत गया तो सबसे अधिक खुश जो खिलाड़ी था वो थे अनिल कुंबले। उस वक्त वो अपने कैमरे से पूरी टीम की खुशी मनाते हुए फोटो खींच रहे थे। कुंबले के साथ यह हरकत कप्तान सौरव गांगुली ने की थी फिर भी वह कुंबले को 'जेंटलमैन' कहते हैं क्योंकि उन्हों ने कभी निजी मनमुटाव को सामने नहीं आने दिया।

Monday, 19 June 2017

13 की उम्र में बिहार की इस महिला ने छोड़ा स्कू्ल, आज है ब्रिटेन की बिजनेसवुमन

नई दिल्‍ली। जरा सोचिए, जब किसी लड़की को 13 साल की उम्र में शादी के लिए पढ़ाई छोड़ने को मजबूर किया गया होगा तब उस पर क्‍या गुजरी होगी। ऐसी स्थिति में आमतौर पर लड़कियां पढ़ाई को बहुत पीछे छोड़ देती हैं और फिर उनका पूरा ध्‍यान परिवार पर हो जाता है। लेकिन बिहार के सीतामढ़ी की आशा खेमका उन लड़कियों में से नहीं थीं। सिर्फ 15 साल की उम्र में शादी होने के बाद उन्‍होंने 36 साल की उम्र में अपनी पहली डिग्री लेने का फैसला और आज ब्रिटेन के सबसे बड़े कॉलेजों में शुमार वेस्ट नॉटिंघमशायर कॉलेज की सीईओ और प्रिंसिपल हैं। आशा खेमका को हाल ही एशियन बिजनेसवुमन ऑफ द ईयर का खिताब दिया गया है। आइए जानते हैं, आशा खेमका की सक्‍सेस स्‍टोरी के बारे में  


बिहार से ब्रिटेन का सफर
मां की मौत के बाद आशा खेमका की शादी हो गई, तब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी। शादी के करीब 11 साल बाद खेमका जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। दरअसल, जब वह 26 साल की थीं तभी उनके डॉक्टर पति शंकर अग्रवाल ने इंग्‍लैंड में नौकरी पक्की कर ली थी। फिर वो अपने पति के पास अपने बच्चों के साथ ब्रिटेन पहुंचीं।

अंग्रेजी बनी सबसे बड़ी मुसीबत
इंग्‍लैंड आने के बाद हिंदी इलाके की आशा खेमका के लिए सबसे बड़ी मुसीबत अंग्रेजी बनी लेकिन कॉन्फिडेंस कम नहीं हुआ। यहां उन्‍होंने टूटी-फूटी अंग्रेजी में साथी महिलाओं से बात करना शुरू किया।  कुछ सालों बाद कैड्रिफ यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनजमेंट की डिग्री ली। एक इंटरव्‍यू में खेमका ने बताया था कि अंग्रेजी में कमजोर होने की वजह से पढ़ाई के दौरान वह प्रोजेक्‍ट अपने बच्‍चों से बनवाती थीं। और टीवी पर बच्चों के लिए आने वाले शो को देखकर अंग्रेजी सीखती थीं।

ऐसे बन गईं प्रिंसिपल
पढ़ाई पूरी करने के बाद आशा ऑस्‍वेस्‍ट्री कॉलेज में पढ़ाने लगीं। अपने छात्रों की फेवरेट टीचर थीं। इसके बाद ब्रिटेन के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार वेस्ट नॉटिंघमशायर कॉलेज में लेक्‍चरर बन गईं। दिलचस्‍प बात यह है कि आज वह इसी कॉलेज की सीईओ और प्रिसिंपल हैं।

मिला ब्रिटेन का सबसे बड़ा सम्‍मान
आशा को 2008 में ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायरसे सम्मानित किया गया।  2013 में ब्रिटेन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'डेम कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर' का सम्मान से नवाजा गया था। उनसे पूर्व ये सम्मान किसी भारतीय मूल के शख्स को 1931 में मिला था। तब धार स्टेट की महारानी लक्ष्मी देवी बाई साहिबा को ये डेम पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

          

Saturday, 17 June 2017

बिहार के इस लाल ने सीईओ पद से दिया इस्तीफा, कभी आमिर खान के थे फेवरेट

आमतौर पर जब किसी शख्स की क्रिएटिविटी या टैलेंट को रिजेक्ट कर दिया जाता है तो वह हार मान लेता है। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर के अरुनाभ कुमार उन लोगों में से नहीं थे। इन दिनों ऑनलाइन एंटरटेनमेंट चैनल द वायरल फीवर (TVF ) के फाउंडर अरुनाभ पर यौन उत्पीड़न जैसा गंभीर आरोप लगा है और उन्हें कंपनी के सीईओ पद से भी हाथ धोना पड़ा है।


क्या  है TVF
द वायरल फीवर ऑनलाइन एंटरटेनमेंट चैनल है। यह यूट्यूब चैनल सेलेब्स, पॉलिटिशियन और मीडिया के कई चर्चित शख्सियतों की पैरेडी वीडियोज बना चुका है। इस वीडियो में डब आवाज और मफ फेस का इस्तेतमाल किया जाता है।      
हर सेमेस्टर में बदलता था मूड
34 साल के अरुनाभ ने IIT खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने दूसरी बार में IIT इंट्रेंस टेस्ट क्वालिफाई किया। एक इंटरव्यू में अरुनाभ ने बताया था कि पिता की जिद के कारण IIT में एडमिशन लिया लेकिन पढ़ाई के दौरान वह हर सेमेस्टर में लक्ष्य बदलते थे। पहले सेमेस्टर में वह इक्नॉमिस्टि बनना चाहते थे तो दूसरे में एमबीए की पढ़ाई करने की सोची। वहीं तीसरे और चौथे सेमेस्टर में वह प्रोग्रामर और यूपीएससी की तैयारी करने का मन बना रहे थे। 
आमिर खान भी हुए इंप्रेस
अरुनाभ ने आईआईटी से ग्रेजुएट होने के बाद मुंबई की ओर रूख कर लिया। यहां यूएस एयरफोर्स प्रोजेक्ट में काम करने के बाद उन्हों ने कुछ शॉर्ट फिल्म बनाए। शानदार रिस्पॉस मिलने के बाद उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में कैरियर को आगे बढ़ाने के बारे में सोची। अरुनाभ ने फिल्म ओम शांति ओम में डायरेक्टार फराह खान के साथ काम किया। इसके बाद उन्हें रेड चिलीज एंटरटेनमेंट में अपना पहला काम मिला। अरुनाभ के काम से प्रभावित होकर आमिर खान ने उन्हें फिल्म डेल्ही बैली में काम करने का मौका दिया।
हर चैनल ने किया रिजेक्ट
इसके बाद अरुनाभ ने अपने शो इंजीनियर की डायरीको ऑन एयर करने के लिए एमटीवी समेत कई एंटरटेनमेंट चैनल्स से संपर्क किया लेकिन सबने रिजेक्ट कर दिया। अरुनाभ ने इस रिजेक्शन को हथियार बनाया और अपना यूट्यूब चैनल TheViralFeverVideos शुरू कर दिया। अरुनाभ ने एक इंटरव्यू  में कहा कि मेरे मन में एंटरटेनमेंट चैनल्स को आईना दिखाने की एक जिद आ गई थी। अरुनाभ के पहले वीडियो को 18 हजार व्यूज मिले। वहीं दूसरे वीडियो को 8 दिन में 10 लाख व्यूज मिल गए।      
50 करोड़ के करीब नेटवर्थ

अरुनाभ की नेटवर्थ अभी 50 करोड़ के करीब है। उनके पास मर्सिडिज वेंच और ऑडी जैसी कारों का कलेक्श्न है। अरुनाभ की सफलता को देखकर फॉर्च्यून मैगजीन ने 2015 और 2016 में 40 अंडर 40 कारोबारियों की लिस्ट में शामिल किया था। फोर्ब्स इंडिया के एक ब्लॉग में लिखा गया कि भारत में ऑन लाइन मार्केट को एंटरटेनमेंट के लिए सबसे सही इस्तेमाल अरुनाभ ने किया।   

Sunday, 11 June 2017

मुझे बहुत बुरा लगा मेरे बेबी ,एबी

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल का​ टिकट कटा लिया है। मुझे अफ्रीका से भारत के जीतने की जितनी खुशी है उतनी ही एबी डीविलियर्स के हारने का गम है। एबी डीविलियर्स उन फेवरेट क्रिकेटर्स में से हैं जिनकी वजह से वर्तमान क्रिकेट में आज भी मेरी दिलचस्पी बरकरार है।   दरअसल, जब से सौरव गांगुली ने क्रिकेट से संन्यास लिया है तब से मेरी इस खेल में दिलचस्पी कम होनी शुरू हो गई है। वर्ना एक दौर ऐसा भी था जब गांगुली की अगुवाई में 2003 विश्वकप के फाइनल में भारतीय टीम पहुंची तो हर मैच के हर शॉट तक दिमाग में फेवीकॉल की तरह चिपक गया था। सहवाग का वो पाकिस्तान दौरे पर मुल्तान का सुल्तान बन जाना या बालाजी का बैट टूट जाना या फिर इंग्लैंड में गांगुली का टी शर्ट उतारना, न जाने ऐसे कई पल हैं जिसको रेडियो पर सुन कर ही मैं एक रेखाचित्र तैयार कर लेता था।

दौर बदला, हर टीम के कप्तान बदल गए, आॅस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को भी हराना आसान हो गया। भारतीय टीम में अनुभवी प्लेयर बाहर होने लगे, नए चेहरे आने लगे। लेकिन कुछ नहीं बदला तो वो दक्षिण अफ्रीका का टैग। वो टैग, जिसे 'चोकर' कहते हैं। हर बड़े टूर्नामेंट से पहले अफ्रीका के हथियार डाल देने की आदत ने लोगों के दिमाग में 'चोकर' छवि को और गाढी ही की है। लेकिन हां, उसके बावजूद न जाने क्यों दक्षिण अफ्रीका के एक प्लेयर के लिए मेरी हमदर्दी हमेशा बरकरार ही रही। वो प्लेयर कोई और नहीं एबी डीविलियर्स हैं। तूफानी शुरुआत से लेकर शानदार विकेटकीपिंग तक न जाने कितने टैलेंट छुपे हैं इस शख्स में। अब्राहम बेंजामिन डीविलियर्स उर्फ अब्बास को अगर क्रिकेट की दुनिया का सुपरमैन भी कहा जाए तो कम ही होगा।
       अच्छा एक सवाल पूछता हूं, आपके दिमाग में अभी कितने खेल के नाम चल रहे हैं? हॉकी, फुटबॉल, रग्बी, स्विमिंग, गोल्फ, बैडमिंटन, एथलेटिक्स... अगर मैं कहूं कि सुपरमैन डीविलियर्स हर खेल के चैंपियन रह चुके हैं तो यकीन करेंगे। अगर यकीन नहीं तो गूगल कर लीजिए ये कोई फर्जी बात नहीं बल्कि सच्चाई है।   यह शख्स हर खेल में चैंपियन की तरह खेला और जब क्रिकेट की बात आई तो यहां भी दुनिया के कई रिकॉर्ड बनाए। डीविलियर्स मैदान में अनुशानसन से लेकर टीम भावना तक की सीख देते रहे हैं।  लेकिन वो बतौर कप्तान सफल नहीं हो सके। उनकी अगुवाई में भी अफ्रीका चोकर ही बनी रही। कई बार अकेले उन्होंने टीम को जीत दिलाई लेकिन हर टूर्नामेंट में फेल हो जाने की टीम की फितरत हमेशा बरकरार ही रही। उन हार के गम को डीविलियर्स अकसर आंसू के जरिए बाहर निकालते रहे हैं। हर बार मुझे उस मासूम चेहरे को देखकर दर्द होता है। विश्वकप 2015 से जब अफ्रीका की टीम बाहर हो रही थी तब भी मुझे दर्द हुआ था। वो दर्द डीविलियर्स के आंसू देखकर और गहरा हो गया था। कमोबेश यही स्थिति आज एक बार फिर चैंपियंस ट्रॉफी में बन गई।  बहरहाल, मेरे एबी डीविलियर्स की महानता इन हारों से कम नहीं होने वाली है।

Friday, 2 June 2017

हिंदी से प्रेम का मीडियम

​वैसे तो मैं जो भी फिल्म देखता हूं उसकी दो से चार दिनों में यादें धूमिल हो जाती हैं और उसे दोबारा देखने की इच्छा भी नहीं होती है। लेकिन पिछले दिनों रिलीज हुई इरफान खान और सबा कमर की फिल्म हिंदी मीडियम देखने के बाद मैं इसे दोबारा देखने को मजबूर हुआ। यह फिल्म हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने वाले उत्तर भारत के उन तमाम युवाओं को छूती नजर आ रही है जो हर दिन हर कदम पर ​अंग्रेजी से अपनी ही लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार पर दिए हुए फैसले का कैसे मजाक उड़ रहा है और किस प्रकार अमीरों में अपने बच्चे को आगे ले जाने की रेस है, इसको बेहद ही कॉमिक अंदाज में पेश किया गया है।
ये फिल्म इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि इसकी लीड एक्ट्रेस पाकिस्तान से हैं। दरअसल, जिस दौर में पाकिस्तान के खिलाफ हमारे देश में नफरत चरम पर है तभी वहां की एक एक्ट्रेस का एक्टिंग के जरिए छाप छोड जाना बेहद खास है।  'हिन्दी मीडियम' ने हमारे देश पर चढ़े अंग्रेज़ी के दीवानापन पर कॉमेडी के जरिए कटाक्ष किया है। फिल्म में ये दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे अंग्रेज़ी स्टेटस सिंबल बन चुका है और इस सिंबल को हासिल करने के लिए लोग किस हद तक जाने को तैयार हैं। यह सच भी है। दुनिया के तमाम ज्ञान होने के बावजूद अंग्रेजी ज्ञान न होने से लोग हीन भावना से ग्रस्त हैं।  इरफान और सबा कमर ने अपने लाजवाब अभिनय से उस कशमकश को बेहद खूबसूरती के साथ पर्दे पर उतारा है।


यह फिल्म एक तीखा जवाब है, उस सिस्टम और लोगों के लिए जो हिन्दी को हीनभावना के चश्मे से देखते हैं। यह फिल्म एक आईना है 'भारत' और 'इंडिया' के बीच के फासले को दिखाने का है। फिल्म में अंग्रेजी और हिंदी के फासले को मिटाने में जुटे इरफान खान का संघर्ष देखने लायक है। तमाम ख्वाहिशों के बावजूद सबा कमर का अपने पति के लिए प्यार भी कम दिलचस्प नहीं है।  दीपक डोबेरियाल के किरदार को देखने के बाद एक बार फिर यह एहसास होता है कि सच में गरीबों का दिल अमीरों से कहीं अमीर होता है।  फिल्म का अंत यह बताने की कोशिश करता है कि उन गरीब बस्तियों में दिखावा नहीं सहजता और ईमानदारी है। वहां लोगों की भावनाओं को कूचला नहीं जाता, अब भी इंसानियात जिंदा है। कमाई की रेस में ये फिल्म कहां टिकती है इसका तो पता नहीं लेकिन हां, इतना जरूर कहूंगा कि हिंदी से प्रेम करने वालों के दिल में जरूर घर बना लेगी।

Friday, 26 May 2017

ये टॉप हेयर डिजाइनर हैं सेलिब्रिटी की पहली पसंद

वैसे तो जब आप हेयर कट कराने के लिए मार्केट में निकलते हैं तो आपकी नजर सबसे पहले अच्‍छे सैलून और हेयर डिजाइनर पर होती है। अगर अच्‍छा हेयर डिजाइनर मिल जाए तो उसके एवज में आप अधिक पैसे भी खर्च करने को तैयार हो सकते है क्‍योंकि हेयर कटिंग ऐसी चीज है जो हर दिन नहीं हो सकती। एक बार अगर अच्‍छी हेयर कटिंग हो जाए तो उसके बाद आप एक महीने तक इसके बारे में ज्‍यादा कुछ नहीं सोचते हैं। जो लोग अपने लुक और हेयर कट को लेकर पजेसिव रहते हैं वह इसके लिए हेयर डिजाइनर को मुंह मांगी कीमत तक देने को तैयार रहते हैं। जी हां,  भारत में कई ऐसे भी हेयर डिजाइनर हैं जो सिर्फ हेयर कट करने के लाखों रुपए ले लेते हैं। आज हम आपको देश के टॉप हेयर डिजाइनर्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

जावेद हबीब
जावेद हबीब भारत के टॉप हे‍यर डिजाइनर में शुमार हैं। खास बात यह है कि उन्‍होंने अपनी फैमिली के इस बिजनेस को आगे बढ़ाया है। उन्‍होंने कर्इ मशहूर हस्तियों के हेयर कट किए हैं। जावेद ने लंदन के मौरिस स्‍कूल से हेयर डिजाइनिंग का कोर्स किया है। उन्‍होंने एक दिन में 410 लोगों के हेयर कट कर लिम्‍का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। जावेद से हेयर कट कराने के लिए उनकी वेबसाइट पर अप्‍वाइंटमेंट लिया जा सकता है। जावेद के सैलून 24 राज्‍यों के 110 शहरों में हैं। इसके अभी 636 आउटलेट्स हैं।

सपना भवानी
सपना, बिग बॉस की एक्‍स कंटेस्‍टेंट रह चुकी हैं। बॉलीवुड के अधिकतर सेलेब्‍स का हेयर कट सपना ही करती हैं। वह लेखक और फैशन डिजाइनर भी हैं। उन्‍होंने मैड ओ वूट नाम से अपना सैलून शुरू किया।

सिल्‍विया रोजर्स
भारत की टॉप हेयर डिजाइनर्स में सिल्‍विया का नाम भी शामिल हैं। लंबे समय से वह भारत में सक्रिय हैं। इससे पहले वह लंदन के सेंट ल्‍यूक अस्‍पताल में सर्जन थीं।

अधुना अख्‍तर
अधुना, एक्‍टर फरहान अख्‍तर की वाइफ हैं। हालांकि दोनों में हाल ही में तलाक भी हो गया है। उनका इंग्‍लैंड में जन्‍म हुआ था। उन्‍होंने फिल्‍म दिल चाहता है में आमिर खान का हेयर कट किया था जबकि फिल्‍म लक्ष्‍य में उन्‍होंने रिपोर्टर प्रीति जिंटा का हेयर कट किया।

आलिम हाकीम
आलिम,  मशहूर हकीम कैरानवी के बेटे हैं। कैरानवी लंबे समय तक अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, सुनील दत्त और विनोद खन्ना जैसे स्टार्स के हेयर ड्रेसर रहे। वे पहले ऐसे हेयर स्टाइलिस्ट हैं जो हेयर ट्रीटमेंट के साथ
बॉडी आर्ट की सर्विसेस भी प्रोवाइड करते हैं। आलिम अपने प्रोजेक्ट्स और पर्सनल टूर के दौरान विएना, अर्जेंटीना, लंदन, ब्राजील, दुबई और पेरिस जैसी जगहों पर घूम चुके हैं।

Wednesday, 24 May 2017

ढिंचाक पूजा : मजाक में भी धाक है..

आप एक रैपर से क्या उम्मीद करते हैं। हनी सिंह और बादशाह की तरह न सही, कम से कम सुनने लायक अच्छा रैप गा लेता हो। यही उल्टे सही रैप कर हरियाणा और पंजाब समेत देश के कई छोटेबडे सिंगर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। कमोबेश सब अपने अपने इलाके में चर्चित भी हैं। लेकिन जरा सोचिए, अगर कोई रैपर गाने में ही 'धीमी गति की समाचार' पढ़ने लगे तो होगा। कल्पना कीजिए, किसी ग्लैमरस लड़की द्वारा गाने को बेसुरे कविता के रूप में सुनाया जाने लगे तो आपके दिल पर क्या बीतेगी। शायद आपके किडनी में 'हार्ट अटैक' आ जाए। हां,   अगर आप आदतन लार टपकाने वालों में से हैं तब तो उस ग्लैमरस गर्ल की आवाज में भी 'साक्षात' लता मंगेशकर को देख लेंगे। सिंगिंग टैलेंट की नई परिभाषा गढ़ रही ढिंचाक पूजा भी कुछ उन्हीं ग्लैमरस गर्ल में से है। जो लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं उन्होंने ढिंचाक पूजा और उनके गानों को तो अब तक सुन ही लिया होगा। हो सकता है आपने, उसके नाम पर बन रहे जोक्स को भी शेयर किया हो।

दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों ढिंचाक पूजा के रैप बेहद सुर्खियों में हैं। उनके गानों को लेकर लोग तरह तरह से मजाक बना रहे हैं। वीडियो में ढिंचाक पूजा अपने कुछ फ्रेंड के साथ मिलकर अपनी 'सिंगिंग टैलेंट' को दिखा रही है। पूजा के गाने किसी सुस्त और बेसुरे कवि के कविता की तरह लग रहे हैं। न कोई राग न कोई रस। ढिंचाक पूजा गानों का बेरहमी से कत्ल कर रही हैं। लेकिन कहते हैं न, अगर आपको पॉपुलरिर्टी और पैसा दोनों चाहिए तो ये भूल जाना होगा कि दुनिया क्या कहेगी। पूजा ने इस बात को बखूबी समझ लिया है। तभी तो आॅडियंस का बिना परवाह किए उसने गाना गा कर संगीन वारदात को अंजाम दिया है। जी हां, उसके गाना सुनना किसी काला पानी की सजा झेलने से कम नहीें है। लेकिन सच यह है कि पूजा आज लाखों लोगों के बीच शुमार हैं। सोशल मीडिया की टॉप ट्रेंड में हैं और व्यूज के जरिए लाखों रुपए कमा चुकी हैं। आप बनाते रहिए जोक्स, उड़ाते रहिए मजाक। 
हाल ही में पूजा ने सेल्फी मैंने ले ली आज गाने को यूटयूब पर पोस्ट किया है। इसको 5 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। इस गाने को आप भी सुनिए , दिल थाम के...


यूट्यूब पर काफी एक्टिव रहने वाली पूजा का इससे पहले भी 'स्वैग वाली टोपी' और 'दारू' वाला गाना खूब फेमस हो चुका है।