Tuesday, 13 September 2016

साहेब के खौफ का भ्रम...

शहाबुद्दीन की रिहाई के कुछ ही घंटों बाद मेरे एक मित्र ने कॉल कर मुझसे पूछा, क्या सच में 'साहेब' की वापसी से सीवान सहम गया है? चूंकि मैं सीवान से हूं तो संभवतः मेरे मित्र ने मुझमें ग्राउंड रिर्पोटर जैसा कुछ देखा होगा। हालांकि मेरे लिए इस सवाल का जवाब देना मुश्किल नहीं था फिर भी बोलने से पहले काफी वक्त लिया। दरअसल, इस सवाल ने एक ही झटके में होश संभालने के बाद के उस 15 साल के काल को सामने लाकर रख दिया, जिसका मैं किसी से कभी जिक्र करना पसंद नहीं करूंगा। वो 15 साल, जिसमें मैंने हत्या और रंगदारी के रोज नए-नए किस्से सुने और हर दिन उसके हत्या करने के तरीकों के बारे में अखबारों में पढ़ा। वो 15 साल, जिसमें मैं क्या,कोई भी शहाबुद्दीन को उनके नाम से नहीं बल्कि 'साहेब' से जानता और संबोधित करता था और अगर किसी ने गलती से 'शहबुआ' बोल दिया फिर तो उसकी खैर नहीं। घर वालों से लेकर बाहर वाले तक खामोश रहने की नसीहत देते रहे।  यह जितना सच है उससे कहीं अधिक सच यह है कि अब सीवान में वैसी स्थिति नहीं है। यह अलग बात है कि कुछ लोग साहेब रिहाई के  बाद जीत का दंभ भर रहे हों लेकिन उन्हें भी बखूबी एहसास है कि यहां अब बच्चा- बच्चा शहाबुद्दीन को साहेब नहीं बल्कि 'शहबुआ' को नाम से बोलने का माद्दा रखता है।  इससे भी इंकार नहीं कर सकते कि भय का माहौल अगर शहाबुद्दीन ने बनाया तो वह सिर्फ सीवान शहर तक ही सीमित था। शहाबुद्दीन इसलिए रॉबिनहुड बना क्योंकि लालू यादव जैसे स्वार्थसाधक राजनीतज्ञ की शरण में था और दूसरी खास बात उसके साथ रही कि वह  मुसलमान है।
  अगर उसके भय की बात करें तो जो लोग सीवान को जानते हैं उन्हें बखूबी पता है। सच तो यह है कि सीवान का पड़ोसी जिला गोपालंगज है और वहां कभी सतीश पांडे के आगे साहेब का 'स्पार्क' नहीं चला तो जिले में ही सुरेश चौधरी, गुड्डु पंडित, अयुब-रईस और अजय सिंह जैसों ने उसे पानी पिलाया। यह बात 11 साल पहले की थी ।

यह तब की बात है जब साहेब की खूब चलती थी और जंगलराज के वह मुख्य किरदार थे।  अब तो ऐसा कुछ है भी नहीं। शहाबु का कथित आतंक भी खत्म हो चुका है। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया की आवाज भी मुखर हो चली है। उसे ललकारने वाले बहुत हैं।ऐसे में जो लोग यह समझ रहे हैं कि 11 साल बाद एक बार फिर से उसका भय सीवान के लोगों में आ गया है तो निश्चित ही वह भ्रम में हैं। जिन लोगों में भय का जो भ्रम है वह जितनी जल्द हो सके इस पट्टी को उतार लीजिए।     


2 comments:

  1. बहुत बढ़िया दीपक। जानकारी भी अंदाज़ भी।

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  2. बहुत बढ़िया दीपक। जानकारी भी अंदाज़ भी।

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thanks