Sunday, 12 June 2016

अनुराग, अब लुढ़कता बिहार भी बना लो..


प्रिय अनुराग कश्यप,
सबसे पहले तो आप  पिछले कुछ दिनों से फिल्म उड़ता पंजाब के लिए जो संघर्ष कर रहे हैं उसकी मैं सराहना करता हूं लेकिन एक बात मैं भी कहना चाहता हूं कि आप भी बेवजह की गालियां ठूसते रहते हो। अब गैंग्स ऑफ बासेपुर को ही ले लो उसमें तो आपने गालियों की नई - नई प्रजाति का निजात किया है। बहरहाल, मैं आपको एक सलाह देना चाहता था। सलाह यह है कि आप अब फिल्म 'लुढ़कता बिहार' बनाइए। यकीं मानिए यह बंगाली बाबा के चूरन से भी ज्यादा लाभकारी होगा । आपको तो पता भी होगा कि आज - कल बिहार में एक गोली से ही इंसान लुढ़क जाता है। लुढ़काने वाला आपको कभी भी लुढ़का सकता है । इसके लिए कोई दिशा-निदेश नहीं है। बस बंदूक होनी जरूरी है और अगर नहीं भी है तो आप राजद के किसी छुटभैये नेता को जानते हैं तो समझो यही काफी है।  अच्छा, खास बात यह है कि लुढ़काने वाले सीना ताने घूम रहे हैं यानी आपको अभिनेता ढंढूने की भी दिक्कत नहीं होगी। अब बात एक और लुढ़कन की कर लेते हैं तो आज कल अपने यहां के टॉपर्स भी खूब लुढ़क रहे हैं। अगर आपकी फिल्म उड़ता पंजाब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति देखती तो यकीं मानिए वहां के होनहार लोग फिल्म को टॉपर बना देते। वैसे आपकी छवि सोशल मीडिया में बेवड़ा की बना दी गई है ऐसे में हमारे राज्य के बेवड़े समाज के लोग भी आपसे एक फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं। दरअसल, जब से शराबबंदी हुई है तब से बेवड़े लोग बंगाल, नेपाल, यूपी से शराब लाने की जद्दोजहद में लगे हैं और लाते भी हैं लेकिन खास बात यह है कि वह बोतल लाकर लुढ़कते अपने बिहार में ही हैं। लुढ़कने के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आपको एक और कहानी की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं । सुना है कि आजकल राज्य की विकास गति भी लुढ़क रही है लेकिन हां इसकी जांच जरूर कर लीजिएगा क्योंकि मेरे पास इसके पुख्ता सबूत नहीं हैं।

यह जानते हुए भी कि मेरी बात आप तक नहीँ पहुंचेगी, उम्मीद करता हूं कि मेरी सलाह पर ध्यान देंगे।

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