Friday, 1 May 2015

दर्शकों से दूर दूर - दर्शन

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान भारत - दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले के बीच अचानक एक युवा ने ट्वीट किया, अब दूरदर्शन पर मैच देखने में मजा नहीं आता, असल मजा तो स्टार स्पोर्ट्स पर अख्तर और कपिलदेव की बकबक सुनने में आता है, वो भी हिंदी में ।’ यूं तो यह एक मजाकिया ट्वीट था लेकिन इस ट्वीट ने दूरदर्शन की नीरसता और स्टार स्पोर्ट्स के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान को बखूबी जाहिर कर दिया। दरअसल, दूरदर्शन ने क्रिकेट विश्वकप-2015 के दौरान भारत के सभी मैचों का प्रसारण किया । दूरदर्शन को यह अधिकार तब मिला जब प्रसार भारती ने देश के सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया। प्रसार भारती की दर्शकों के लिए लंबी लड़ाई के बावजूद विश्वकप के दौरान दूरदर्शन के प्रति उनकी उदासीनता ने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया। सवाल यह कि क्या दूरदर्शन दर्शकों के नब्ज को पहचान पाने में नाकाम है या फिर सरकारी ढर्रे में चलने का आदी है?  



यह सच है कि जब एक तरफ स्टार स्पोर्ट्स नए-नए प्रयोगों से खुद को दर्शकों के पसंद से अपडेट कर रहा है वहीं दूरदर्शन उसी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। अगर इसी विश्वकप की बात की जाए तो स्टार ने क्रिकेट की सर्वोत्तम प्रस्तुति, व्यापक कवरेज, कई भाषाओं में पेशकश और दर्शकों के अनुभव को नया रूप देते हुए उसे खेल में गहराई तक ले जाने का प्रयास किया। वहीं दूरदर्शन पर घिसे - पिटे तरीके से कमेंट्री सुनने को मिला और गेस्ट पैनल में गुमनाम चेहरों को बिठा दिया गया। हद तो तब हुई जब कमेंट्री में हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रण देखने को मिला। सवाल यह है कि जब विदेशी व्यक्ति हिंदी भाषा को तवज्जो देते हुए एक नया चैनल  खड़ा कर सकता है तो फिर देसी कलेवर के दूरदर्शन को हिंदी से परहेज क्यों है? हिंदी पट्टी क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में दूरदर्शन का वर्चस्व है फिर भी सरकार की पनाह में पल रहे इस चैनल की दर्शकों के प्रति उदासीनता क्यों है?  स्टार ने इस खेल आयोजन के लिए बहुत सारे नवाचार अपनाए। उसने लीक से हटकर ‘मौका’ अभियान चलाया जो मैदान में क्रिकेट से आगे चला गया और प्रशंसकों के जुनून का अनोखा उपयोग किया। यह अभियान जबरदस्त गति से बढ़ता हुआ। यह विज्ञापन ऑनलाइन 1.7 करोड़ से ज्यादा व्यूज को पार कर गया। स्टार के इस बार नए लुक के ग्राफिक्स तैयार किए गए । दुनिया में पहली बार क्रिकेट को किसी अन्य शहर (मुंबई ) में  बैठकर होलोग्राम तकनीक में पेश किया गया और कमेंट्री पैनल में सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ बिठाए गए। इसमें 13 विश्व कप के कप्तान, 20 विश्व कप विजेता और 26 विश्व कप सेमी - फाइनलिस्ट खिलाड़ी थे।  स्टार ने भारतीय सिनेमा की सर्वोत्तम आवाज और हिंदी भाषा के जानकार , अमिताभ बच्चन की भी सेवा ली। उन्होंने भारत के सबसे बड़े खेल में बतौर कमेंटेटर शुरुआत की। उन्हें भारत - पाकिस्तान मैच के लिए कपिल देव, शोएब अख्तर, राहुल द्रविड़ व संजय मांजेरकर को लेकर बने स्टार स्पोर्ट्स पैनल में शामिल किया गया। इसके अलावा यूथ आइकन बन चुके रणबीर कपूर को भी कमेंट्री करने का मौका मिला। एक आंकड़े के मुताबिक इस समय देश में करीब 40 लाख घरों के पास एचडी कनेक्शन है। इसके मद्देनजर स्टार स्पोर्ट्स ने विश्व कप के मैचों का प्रसारण भारत में स्पोर्ट्स के पहले संपूर्ण हिंदी एचडी चैनल, स्पोर्ट्स एचडी तीन समेत चार एचडी चैनलों के नेटवर्क पर किया। अगर दर्शकों के पसंद की बात की जाए तो वहां भी दूरदर्शन पर स्टार हावी है। टूर्नामेंट के आधिकारिक ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, भारत - पाकिस्तान के मैच को स्टार नेटवर्क पर 11.9 टीवीआर ( टेलीविजन व्यूअर रेटिंग) मिले जबकि दूरदर्शन को 2.9 टीवीआर हासिल हुए। भारत-पाकिस्तान मैच ने शीर्ष के छह महानगरों में 17.2 की टीवीआर और 10 लाख से ज्यादा आबादी के शहरों में 15.5 की टीवीआर हासिल की। ब्रॉडकास्टर का यह भी दावा है कि 28.8 करोड़ दर्शकों ने स्टार के नए -नए प्रयोगों से मैच को देखने की पहल की। 2011 में क्रिकेट विश्व कप के फाइनल के बाद से यह मैच पिछले चार सालों में भारत में टेलीविजन पर सबसे ज्यादा देखी गई इवेंट है। खेल को 76 प्रतिशत दर्शक हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं की फीड से मिले और बाकी 24 प्रतिशत दर्शक अंग्रेजी से मिले। इसने स्टार द्वारा शुरू की गई बहुभाषी रणनीति को सही साबित किया। इस मैच ने स्टार के डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर 2.5 करोड़ से ज्यादा व्यूज हासिल करके दुनिया में नया इतिहास रचा। यह सारी दुनिया में अभी तक एक दिन में किसी भी स्पोर्ट्स इवेंट को मिले सबसे ज्यादा व्यूज हैं। भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने भारत में सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त धमाल मचाया और उसे तीन अरब हिट्स या फीड मिले। दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों में दूरदर्शन दूर दूर तक नहीं है। दूरदर्शन की ओर से दर्शकों के लिए न कोई विज्ञापन किए गए और न ही किसी तरह के प्रयोग। तो फिर दर्शकों का रूझान स्टार की ओर क्यों न बढ़े?