Monday, 6 May 2013

बेस्ट इँस्पायरिँग डायलोग ऑफ सिनेमा


1. डकैत तो संसद मेँ होते हैँ बीहड़मेँ तो बागी मिलते हैँ - इरफान खान (पान सिँह तोमर)
2. वो दो कौड़ी का मुल्क जो आने वाले समय मेँ शायद दुनिया के नक्शेसे मिट जायेगा, जिसका आटा भी विदेशी चक्की से पिस के आता है, एक सुई तक बनाने कीऔकात नहीँ पर हमारे देश को तोड़ने के सपने देखते है | वो ये सपना देख सकते हैँ क्यूँकि वो जानते हैँ कि ये मुर्दोँ का देश है वतन के लिये किसी को हमदर्दी नहीँ
-- नाना पाटेकर (क्राँतिवीर)
3. भीख मेँ मिले देश और दान मेँ मिले हथियारोँ के दम पर इतना भोँकना ठीक नहीँ, कायरोँ की तरह मंदिरोँ ओर मस्जिदोँमेँ घुसकर औरतौँ और बच्चोँ कौ मारते हैं, अबतक जिँदा हो क्यूँकि हमारी सरकारने हमेँ रोक रखा है जिस दिन जंग का एलान होगा अन्दर घुस कर मारेँगे
... ... हमारा एक एक जवान तुम्हारी नपुँसक फौजपर भारी पड़ेगा - अजय देवगन
4. आज जिससे भी पूँछो वो कहेगा मैँडॉक्टर बनूँगा मैँ इंजीनियरबनूँगा आईएस बनूँगा वकील बनूँगा लेकिन एकबी आदमी नेता बनने को तैयार नहीँ है पॉलीटिक्स गटर है ये बोलकर सब भाग जाते हैँ लेकिन कोई भी इस गटरमेँ उतरकर इसे साफ करने को तैयार नहीँ है
देश के सभी नौजवान यही सोचते हैँ एक पन्द्रह बीस हजार की नोकरी मिल जाये एक सुन्दर सी लड़की शादी करने को मिल जाये फिर बुढ़ापे
तक रुपया जमा करके शहर के बाहर 12 एकड़ जमीन खरीद लेँगे वहाँ700-800 स्वायर फीट का एक घर बनायेँगे घर पर पीला वाला पेँट होगा सामने गार्डन होगा औरगार्डन मेँ एसी चेयर पर बैठके अखबार पढके अपनी बीबी से कहेँगे " डार्लिँग पॉलीटिक्स ने इस देश को खत्म कर दिया है"
-- परेश रावल (नायक)